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10-07-2026

नाम नहीं, गुणों से बनती है वास्तविक पहचान

नाम नहीं, गुणों से बनती है वास्तविक पहचान 
राधे-राधे!
आज मन बहुत शांत था। श्री राधा-कृष्ण का स्मरण करते हुए कुछ विचार हृदय में आए और उन्हें शब्दों में लिखने की प्रेरणा मिली। मुझे लगता है कि जब मन भगवान की शरण में होता है, तब भीतर से ऐसे विचार स्वतः प्रकट होने लगते हैं जो हमें स्वयं को बेहतर बनाने की प्रेरणा देते हैं।
जीवन में कभी-कभी कार्य का दबाव, अनेक जिम्मेदारियाँ और मानसिक तनाव इतना बढ़ जाता है कि अनजाने में हमारी वाणी कठोर हो जाती है। कभी हम ऊँची आवाज़ में बोल देते हैं या किसी पर झुँझला जाते हैं। ऐसा मेरे साथ भी कभी-कभी हो जाता है। लेकिन हर बार मन यही प्रार्थना करता है—हे श्री राधे कृष्ण! मेरी वाणी में मधुरता, हृदय में करुणा और व्यवहार में विनम्रता बनी रहे।
आज समाज और परिवार में अक्सर यह देखने को मिलता है कि लोग अपने नाम, प्रसिद्धि और सम्मान को अधिक महत्व देते हैं। हर व्यक्ति चाहता है कि उसका नाम सबसे आगे आए। लेकिन क्या यही जीवन का उद्देश्य है?
मेरे विचार से नहीं। यदि हमारा मन अहंकार से भर जाए, तो नाम और प्रसिद्धि भी हमें शांति नहीं दे सकते। पर यदि हमारे भीतर प्रेम, सेवा, दया, विनम्रता और भगवान के प्रति समर्पण हो, तो बिना किसी प्रयास के लोग हमें सम्मान देने लगते हैं।
प्रेमानंद  महाराज  जी के सत्संग सुनकर मन को गहरी शांति मिलती है। उनके वचनों से यही प्रेरणा मिलती है कि जीवन में भगवान का नाम, सेवा, विनम्रता और प्रेम सबसे बड़ा धन है। जब मनुष्य अहंकार छोड़कर प्रभु की शरण में चलता है, तब उसके जीवन में सच्ची शांति और आनंद का उदय होता है।
श्री राधा-कृष्ण की भक्ति हमें सिखाती है कि प्रेम ही जीवन का सार है। जहाँ प्रेम है, वहाँ ईर्ष्या नहीं; जहाँ सेवा है, वहाँ अहंकार नहीं; जहाँ भगवान का स्मरण है, वहाँ मन की अशांति टिक नहीं सकती।
आइए, हम सब अपने जीवन में यह संकल्प लें कि हम अपने नाम से अधिक अपने गुणों को महान बनाएँगे। मधुर वाणी बोलेंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे, किसी का हृदय नहीं दुखाएँगे और हर कार्य श्री राधा-कृष्ण को समर्पित भाव से करेंगे। यही जीवन की सच्ची सफलता है और यही वास्तविक पहचान है।
"हे श्री राधेकृष्ण??
 हमें ऐसा जीवन दीजिए कि हमारे शब्दों से प्रेम, हमारे कर्मों से सेवा और हमारे हृदय से केवल आपका स्मरण झलके। यही हमारी सबसे बड़ी पहचान बने।"
राधे राधे
डॉ गीतांजलि बौहरे
माधव शिक्षा महाविद्यालय
ग्वालियर